Holika Dahan katha: होलिका दहन कथा आखिर क्यू मनाया जाता है, कब से होलिका दहन का प्रथा, जाने पौरोणिक कथा
Holika Dahan katha: होलिका दहन कथा आखिर क्यू मनाया जाता है, कब से होलिका दहन का प्रथा, जाने पौरोणिक कथा
India VlogMarch 22, 2024Holika Dahan katha: होलिका दहन कथा आखिर क्यू मनाया जाता है, कब से होलिका दहन का प्रथा, जाने पौरोणिक कथा
Holika Dahan katha : 2024 : देश भर में होली पर्ब बहुत धूम धाम से मनाया जाता है |
रंगों वाली होली खेलने से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत पर मानिये जाते है| होलिका दहन के दिन होलिका का पूजा करने का परंपरा है। धार्मिक परंपरा के अनुसार इस दिन बिष्णु के भक्त प्रलाद को जलाने के वाले होलिका खुद ही अगनि में जल गयी थी। जिसके कारण इस दिन होलिका दहन मनाये जाते है. आइये जानते है होलिका दहन की पूरी कथा
होलिका दहन, हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें होली के एक दिन पहले यानी पूर्व सन्ध्या को होलिका का सांकेतिक रूप से दहन किया जाता है। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व के रूप में मनाया जाता है। होली क्या है?
होली, रंगों का खूबसूरत त्योहार है, जो भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसे “रंगपंचमी” और “धुलेंडी” के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है, जो सर्दी के बाद नई शुरुआत और प्रकृति के खिलने का संकेत देता है।
कब मनाई जाती है?
होली हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है, जो सामान्यतः फरवरी या मार्च के महीने में पड़ती है। यह आमतौर पर दो दिनों तक चलने वाला उत्सव है।
होली कैसे मनाई जाती है?
पहला दिन (होलिका दहन): होली के पहले दिन को होलिका दहन के नाम से जाना जाता है। इस दिन शाम को लोग एक अलाव जलाते हैं, जिसे होलिका कहते हैं। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
दूसरा दिन (धुलेंडी): होली का मुख्य दिन धुलेंडी होता है। इस दिन लोग जमकर रंग खेलते हैं। सूखे रंग (गुलाल), गीले रंग और पानी के रंगों से एक दूसरे को सराबोर कर देते हैं। ढोल की थाप पर लोग नाचते गाते हैं। इस दिन मेल-मिलाप का भाव होता है और गिले-शिकवे भुला दिए जाते हैं।
होली का महत्व:
होली का त्योहार सिर्फ रंग खेलने का ही उत्सव नहीं है, बल्कि इसका गहरा सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी है।
पौराणिक कथाएँ: होली से जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ हैं, जिनमें से सबसे प्रचलित है हिरण्यकश्यप और उनके पुत्र प्रह्लाद की कहानी। यह कथा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
सामुदायिक सद्भाव: होली का त्योहार भेदभाव मिटा कर आपसी प्रेम और सद्भाव को बढ़ावा देता है। इस दिन हर कोई एक रंग में रंगा होता है, जाति, धर्म या सामाजिक स्तर का भेद खत्म हो जाता है।
नए शुरुआत का प्रतीक: वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक होने के नाते, होली नई शुरुआत और सकारात्मक बदलाव का भी संदेश देती है।
मुझे उम्मीद है कि होली के बारे में हिंदी में दी गई यह जानकारी आपके लिए उपयोगी रही होगी!
होली है क्या लोग तो ये भी नहीं जानते कि प्रहलाद महाराज कौन है लोग तो यह भी नहीं जानते कि राजा हिरनकेशप कौन है लोगों को तो यह भी नहीं मालूम होली का नरसिंह नरसिंह देव जी कौन है होली का कौन है ये क्या है यह अरे उनको पहले यह जानना चाहिए कि भाई होली मनाई क्यों जाती है क्या कारण है य उत्सव क्यों होता है|
ऐसे बस रंग फेंका उत्सव हो गया कि साहब बैंड वालों ने बैंड बजाया शादी हो गई ऐसा तो नहीं होता है अरे पहले धूला तैयार होगा दुल्हन तैयार होगी फिर बै बाजा आ जाएगा हम सीधा ब पहुंच जाते कहते हैं ना यहां सारे हमारी प्रकृति में बहुत सारे रंग हैं और रंगों की बात करें तो होली को हम छोड़ नहीं सकते हैं बहुत सारे लोग लोग कहीं पे जैसे है लठमार होली होती है कहीं पे रंगों से होली होती है कहीं पे फूलों से होली होती है होली है|
क्या मैं आपसे जानना चाहूंगी देखिए सबसे बड़ी बात ये है कि ये जो होली की आप चर्चा कर रहे हैं पहले उस लेवल पे आइए पहले उस ले उस लेवल पे आइए ये होली सिर्फ ब्रज की है कहां की है ब्रज की ब्रज और यह होती भी थी भगवान के टाइम में आज के टाइम में नहीं आज के टाइम में तो उदंड होता है क्या होता है उंड होता है गोपी बोलने से गोपी नहीं हो जाते बोलने से गोपी और गोप नहीं हो जाते यह भाव है क्या है य भाव इससे अब फिर हमारे लिए क्या है होली होली होली में हुआ क्या था होली किससे रिलेटेड है,
कृष्ण भगवान तो मनाते थे वो तो उनका तो हर लीला ही अजीब है आप उसमें पार्टिसिपेट नहीं कर सकते जब तक आप क्वालिफाइड नहीं हो अरे हार्ट सर्जरी बड़ी मजेदार है परंतु थोड़ी कोई घुस के कर सकता है उस पार्टिसिपेट इसी तरीके से ब्रज की होली को देखने आते हैं अरे पहले स समझो तो ब्रज में एंट्री तो लो हम लोग सोचते हैं टिकट लेकर ब्रज में आए जाते हैं मैं तो कहीं नहीं पढ़ा शास्त्रों में कि गाड़ी लेके ब्रज पहुंच गए हां ये बहुत होता है प्रभु जी कि जब होली की बात आती है ना तो लोग ब्रज की तरफ बहुत ल होली की सिनेमा थोड़ी है कोई ये ये सिनेमा थोड़ी है ये मजा लेने की जगह थोड़ी है यह तो भगवान के सेवा का स्थान है.
यहां हर व्यक्ति राधा रानी तक सेवा कर रही है यहां कृष्ण भगवान राधा रानी की सेवा करते हैं ये इस इस ब्रज का महत्व है क्योंकि बाकी हर जगह राधा रानी सं समस्त लक्ष्मि हों की मूल है बाकी समस्त वैकुंठ के अंदर लक्ष्मी जी कृष्ण की सेवा कर रही है नारायण की सेवा कर रही है सिर्फ ब्रज में मूल लक्ष्मी राधा रानी की सेवा कौन कर रहे हैं स्वयं समस्त विष्णुं के उद्गम जो है कृष्ण भगवान कर रहे हैं यह जगह बहुत अलग है दिस इज समथिंग चच कैन नॉट बी सोच भी नहीं सकते तो होली हम लोगों के लिए क्या है लोग तो यह भी नहीं जानते कि प्रहलाद महाराज कौन है लोग तो यह भी नहीं जानते कि रणा क शप कौन है.
लोगों को तो यह भी नहीं मालूम होलिका नरस नरसिंह देव जी कौन है होली का कौन है ये क्या है ये अरे उनको पहले ये जानना चाहिए कि भाई होली मनाई क्यों जाती है क्या कारण है ये उत्सव क्यों होता है ऐसे ही बस रंग फेंका उत्सव हो गया कि साहब बैंड वालों ने बैंड बजाया शादी हो गई ऐसा तो नहीं होता अरे पहले धूला तैयार होगा दुल्हन तैयार होगी फिर बैंड बाजा आगा हम सीधा बैंड बाजे पहुंच जाते कि साहब आपका बैंड बाजे में गए थे आपकी शादी हो गई अ बेवकूफ ब बाजे में गया था शादी थोड़ी हुई है मेरी तो होली किस लिए है अरे प्रहलाद महाराज के पिता हिरना कश्यप असुर असुर कौन होता है जो भगवान विष्णु को परम भगवान नहीं मानता पदम पुराण में स्पष्ट लिखाहै वह बोलते थे कि मैं विष्णु हूं मैं ही भगवान हूं जो आजकल के गुरु भी कहते हैं हमारे प्रभुपाद जी का यही पसंद आया थामुझे और हमारे किसी वैष्णव संप्र अंदर चाहे रामाचार्य संप्रदाय हो माधवाचार्य जी.
का हो वल्लभाचार्य जी का हो विष्णु स्वामी का हो निंबार्काचार्य जी का हो एक स्वर में कहते हैं हम भगवान ना तो थे ना है ना कभी बनेंगे गुरु की इज्जत भगवान जैसी होती है परंतु वह भगवान नहीं होते सारे असुर भगवान बनना चाहते हैं जब प्रहलाद महाराज ने अपोज किया तो उन्होने दुनिया भर के तरीके अपनाए शॉर्ट में बता रहा हूं और एक तरीका क्या था कि उनकी होली का बहन जो थी उसकी स्पेशलिटी कि वोह आग के अंदर जलती नहीं थी क्या नहीं होती थी जलती नहीं उने कहा प्रहलाद महाराज को उस गोदी में र बिठाकर और आग लगा दूंगा क्या कर दूंगा आग लगा द गोदी में बिठाया अग्नि लगाई प्रहलाद महाराज को तो कुछ नहीं हुआ होलि का जल गई क्योंकि भगवान के भक्तों को कोई कुछ नहीं कर सकता है.
यह सिद्ध करता है कि आप कितने भी बड़ेआपके पास क्या मिल जाए आपको सिद्धियां मिल जाए सिया मिल जाए कुछ भी हो जाए शक्तिया आ जाए आप में परंतु भगवान के भक्त के सामने कुछ नहीं चलता तो इसलिए क्या बन जाओ भगवान के भक्त बन जाओ कृष्ण और राम जी के भक्त बन जाओ तब वो जला तो लोगों में हर्ष उल्लास हो गया इसीलिए उन्होंने क्या बनाया होली और एक चीज और जो आज होता है.
शहरों में तो अब तो जला नहीं सकते लकड़ी की कमी हो गई होली का जलाते थे हम लोग अभी परंतु छोटे शहरों में गांव में देखिए कितने मजे की बात है कितने मूर्ख है हम लोग वहां एक ड़ते हैं डंडा यह प्रहलाद महाराज है और होलिका को जलाते हैं और जो राख होती है वो तो होली का है उसको घर में लाकर ड़कते हैं मूर्ख और प्रहलाद महाराज को उखाड़ के डंडा फेंक देते बताइए तो वो जो राख होती है.
प्रभु जी वो हमें घर लेके नहीं आना चाहि अरे वो तो होलिका की राख है वो प्रहलाद महाराज की राख थोड़ी है असुर की राख लेके आते हैं घर में और यह प्रव प्रचल प्रचलन खूब चल रहा है दबा के और जो गाड़ हैं क्या ड़ते हैं वो जो डंडा ड़ते हैं कि प्रहलाद महाराज है उसको जला के आए थे लाइफ में सब उल्टा होता है इसीलिए कह रहे हैं कि शायद कलयुग है क्योंकि प्रभु जी बहुत सारे लोग ये काम करते हैं.
जहां होलिका जलती है ना उसमें कोई एक सिक्का डाल देता है और कोई घर की वहां की उर ले आता है और उसको रखता है संभाल के साल भर रहेगा तरक्की होगी अच्छी तरक्की होगी जैसे व जली वैसे सब जल जाए अरे मैं कॉमन सेंस की बात कर रहा हूं भाई

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