निर्मल महतो कौन थे जाने उनके जीवनी के बारे में
झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष कैसे बने
निर्मल महतो की कर शैली को देखते हुए 1 जनवरी और 2 जनवरी 1983 को धनबाद में झाबुआ का प्रथम महा अधिवेशन रखा गया और निर्मल महतो को उनकी उग्रता एवं एवं कार्य शैली को देखते हुए केंद्रकार्यकरणी समिति चुना गया. 6 अप्रैल 1984 को निर्मल महतो को झारखंड मुक्ति मोर्चा की केंद्र समिति की बैठक हुई जिसमें सर्व सम्मानित के साथ निर्मल महतो को अध्यक्ष बनाया गया l
शहीद निर्मल महतो की जीवन परिचय l Nirmal Mahto Biography in hindi
जोहर दोस्तों आप सभी को एक ऐसे महान व्यक्ति के बारे में बताने जा रहा हूं जो की झारखंड राज्य के लिए और गरीबों और किसान के लिए मसीहा थे l शहीद निर्मल महतो
निर्मल महतो ऐसे व्यक्ति थे जो की गरीबों के सहयोग के लिए और उसकी मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे क्योंकि निर्मल महतो कहीं भी अगर कई मजदूर को सताया जा रहा हो या उस पर कोई हुकुम चलाया रहा हो हमेशा मजदूरों के साथ खड़े रहते थेl निर्मल महतो जो की काफी लोकप्रिय आंदोलनकारी नेता थेl बहुत कम ही समय में ऐसा मुकाम हासिल कर लिया थाl निर्मल महतो हमेशा गरीबों की मदद और मजदूरों का साथ और किसानों का साथ देते थे और शोषित पीड़ित लोगों को शोषण उत्पीड़न अत्याचार और भ्रष्टाचार से मुक्ति दिला सके ऐसे में बहुत बहुत सारे आंदोलन किए हैं l इसी परिणाम का नतीजा था कि 15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग राज्य बनाl
शहीद निर्मल महतो की जीवनी Nirmal Mahto
झारखंड अलग राज्य के लिए महत्वपूर्ण योगदान देने वाला निर्मल महतो जो की अपना बहुमूल्य जीवन झारखंड राज्य के लिए बलिदान दिया हैl तत्कालीन बिहार के पूर्वी सिंहभूम जिला अंतर्गत उलियान नामक गांव में 25 दिसंबर 1950 को हुआ था.
शहीद निर्मला महतो के माता-पिता
शहीद निर्मल महतो के माता- श्रीमती प्रिया महतो और पिता का नाम श्री जगबंधु महतो जगबंधु महतो के आठवें पुत्र में एक
पुत्री में निर्मल महतो द्वितीय पुत्र थे l
निर्मल महतो का छात्र जीवन और राजनीतिक सफर
निर्मल महतो की पढ़ाई जमशेदपुर के टाटा वर्कर्स हाई स्कूल से मैट्रिक पास किए थे l निर्मल महतो में बचपन से ही आंदोलनकारी और नेट वाले गुण थे जो कि आगे चलकर काफी लोगों को उसकी बातों को पसंद करने लगे और सुनने के लिए उत्सुक होते थे l 1975 में कुछ आज सामाजिक तत्वों से मुठभेड़ होने के कारण वह अपने पढ़ाई को पूरा नहीं कर सके और इसके बाद में आंदोलन का नेतृत्व करते हुए वह झारखंड आंदोलन में खुद पड़े
निर्मल महतो ने राजनीतिक जीवन में उन्होंने सबसे पहले झारखंड पार्टी से शुरू किया और एक जुझारु नेता के रूप में अपने आप को स्थापित किया, निर्मल महतो ने गरीबों की मदद 1980 तक करते रहे वे बिहार विधानसभा के चुनाव में लड़े लेकिन सफलता नहीं मिलीl
पार्टी में कुछ बदलाव करते हुए शैलेंद्र महतो के प्रेरणा से 15 दिसंबर 1980 को झारखंड मुक्ति मोर्चा में विधवाहट रूप से शामिल हो गए 18 जुलाई 1981 को जमशेदपुर में झामुमो का सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें निर्मल महतो को जिला उपाध्यक्ष निर्वाचित किया गया l
झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष कैसे बने
निर्मल महतो की कर शैली को देखते हुए 1 जनवरी और 2 जनवरी 1983 को धनबाद में झाबुआ का प्रथम महा अधिवेशन रखा गया और निर्मल महतो को उनकी उग्रता एवं एवं कार्य शैली को देखते हुए केंद्रकार्यकरणी समिति चुना गया. 6 अप्रैल 1984 को निर्मल महतो को झारखंड मुक्ति मोर्चा की केंद्र समिति की बैठक हुई जिसमें सर्व सम्मानित के साथ निर्मल महतो को अध्यक्ष बनाया गया l
निर्मल महतो जब झारखंड मुक्ति मोर्चा का कमान संभालने लगे तब झारखंड राज्य आंदोलन बहुत बढ़ चुका था। उसी समय छोटा नागपुर में कैसी दुर्घटना होती है जिसमें आंदोलन को एक अलग मोड पर लाकर खड़ा कर देता है 1982 में छोटा नागपुर क्षेत्र में भयंकर अकाल पड़ा जिसके कारण आंदोलन में बहुत तरह के समस्याओं का सामना करना पड़ा l
आंदोलन को दबाने के लिए बिहार सरकार के में बैठे लोगों ने जो अनाज गोदाम में जमा था उसे दूसरे जगह शिफ्ट किया गया और लोगों को अनाज नहीं देने का हुक्म दिया क्योंकि अगर अनाज नहीं नहीं रहेंगे तो लोग कैसे आंदोलन करेंगे और बिना खाए कितना दिन आंदोलन करेंगे लेकिन कहां हार मानने वाले हैं झारखंड के आंदोलनकारी निर्मल महतो l
AJSU का गठन गठन ?
निर्मल महतो हमेशा किसान और विद्यार्थियों और गरीबों के लिए आवाज उठाते हैं इसके लिए निर्मल महतो के दिल में विद्यार्थियों के प्रति काफी दया भावना रहते थे जिसके कारण निर्मल महतो ने एक दिन निर्णय लिया कि झारखंड के विद्या विद्यार्थियों के लिए एक राजनीतिक दल का गठन करना जरूरी है क्योंकि उस समय कोई ऐसा राजनीतिक संगठन नहीं था जो कि विद्यार्थी के समस्या के बारे में बात करें जो झारखंड स्टूडेंट यूनियन AJSU 1920 और 21 अक्टूबर 1986 को जमशेदपुर अखिल झारखंड एवं बुद्धिजीवी सम्मेलन का आयोजन किया गया और आजउसको कुछ ही दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर खड़ा कर दिया.
निर्मल महतो ने सूर्य सिंह बेसरा को आज अशोक का जनरल सिक्योरिटी बनाया गया और इस पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए पार्टी के भाग डोर को सूर्य सिंह मिश्रा के हाथों में सोपा गया। झारखंड के आंदोलन के दुश्मनों के शिकार बने निर्मल महतो।
निर्मल महतो का शहादत कब हुआ
जब निर्मल महतो और सूर्य सूरज मंडल एवं मोर्चे के कार्यकर्ताओं के साथ जमशेदपुर के चमरिया, बिस्टपुर इस्तित टिस्को जेस्ट हाउस निकल रहे थे, कुछ गद्दारों ने निर्मल महतो की जानकारी बिहार के शूटर को दिया गया की निर्मल महतो और सूरज मंडल दोनों ही अकेले हैंl आज 8 अगस्त 1987 को इस समय दो हत्यारे निर्मल महतो के सीने में तीन बार फायरिंग करते हैं। पहले गोली उनके मुंह पर दूसरी गोली पीठ पर तीसरी गली उनके सीने पर लगी जिसके कारण उसकी मौत घटनास्थल पर ही हो जाती है गोली के लगने से निर्मल महतो की मौत हो जाती है और एक उभरता हुआ चेहरा राजनेता का अंतिम सफर खत्म हो जाता हैं।
दोनों हथियारों का नाम वीरेंद्र सिंह नामक एक व्यक्ति ने निर्मला महतो को मारा।
निर्मल महतो की हत्या राजनीतिक सजन के तहत की गई लेकिन बिहार सरकार ने इस पर कुछ भी कार्रवाई नहीं करते हैं और प्रतिद्वंता का नाम देकर कैसे बंद कर देते हैं अलग राज बनने के निर्मल महतो के हत्या के साज इस का पर्दाफाश में रुचि भी नहीं दिखाई और निर्मल महतो की शहादत एक रहस्य में बदल गया और एक रहस्य रह गया।
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शहीद निर्मल महतो की जीवनी

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